मुफ़्त · साइन इन नहीं

ई-इनवॉइस लागू है या नहीं: चेकर

अपने टर्नओवर के दो सवालों के जवाब दें और देखें कि ई-इनवॉइस आप पर लागू है या नहीं, 30 दिन की रिपोर्टिंग लिमिट लागू है या नहीं, और आपके बिलों पर HSN के कितने अंक चाहिए।

= ₹6,00,00,000

= ₹4,50,00,000

ई-इनवॉइस लागू है या नहीं

ई-इनवॉइस

ज़रूरी है

2017-18 से किसी साल में ₹5 करोड़ पार हुआ है, इसलिए B2B बिल, क्रेडिट और डेबिट नोट, एक्सपोर्ट और SEZ सप्लाई पर IRN चाहिए।

30 दिन की रिपोर्टिंग लिमिट

लागू नहीं

पिछले साल ₹10 करोड़ से कम, या ई-इनवॉइस ज़रूरी नहीं। फिर भी बिल वाले दिन ही रिपोर्ट करें।

बिल पर HSN के अंक

4 अंक

₹5 करोड़ तक टर्नओवर: B2B बिल पर 4 अंक, B2C पर ज़रूरी नहीं।

आपके ब्राउज़र में चलता है। आप जो लिखते हैं, वह न सेव होता है, न भेजा जाता है।

नियम 17-10-2026 को जाँचे गए

चेकर कैसे इस्तेमाल करें

  1. करोड़ में अपना 2017-18 से किसी भी वित्त वर्ष का सबसे ज़्यादा एग्रीगेट टर्नओवर डालें। एग्रीगेट टर्नओवर पूरे भारत में आपके PAN पर सभी GSTIN का जोड़ है।
  2. पिछले वित्त वर्ष का एग्रीगेट टर्नओवर डालें। FY 2026-27 के लिए यह FY 2025-26 है।
  3. अगर आपका बिज़नेस नीचे दी गई छूट वाली श्रेणियों में है, तो बॉक्स पर टिक करें।
  4. तीनों जवाब पढ़ें: ई-इनवॉइस, 30 दिन की लिमिट और HSN अंक।

ई-इनवॉइस की लिमिट: ₹5 करोड़

1 अगस्त 2023 से (Notification 10/2023-Central Tax), रजिस्टर्ड बिज़नेस को ई-इनवॉइस बनाना होता है अगर 2017-18 से किसी भी वित्त वर्ष में उसका एग्रीगेट टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा रहा हो।[1] यह जाँच हर पिछले साल को देखती है, इसलिए एक बार लिमिट पार होने पर, बाद में टर्नओवर घटे तब भी ई-इनवॉइस जारी रहता है।

ई-इनवॉइस का मतलब है हर बिल को इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (IRP) पर रिपोर्ट करना और बदले में IRN और साइन किया QR कोड पाना। इसमें B2B टैक्स इनवॉइस, क्रेडिट नोट और डेबिट नोट, एक्सपोर्ट और SEZ को सप्लाई आते हैं। ग्राहकों को बिक्री (B2C) IRP पर रिपोर्ट नहीं होती।

ई-इनवॉइस की टर्नओवर लिमिट कैसे घटी
कब सेई-इनवॉइस किस टर्नओवर से ऊपर लागू
1 अक्टूबर 2020₹500 करोड़
1 जनवरी 2021₹100 करोड़
1 अप्रैल 2021₹50 करोड़
1 अप्रैल 2022₹20 करोड़
1 अक्टूबर 2022₹10 करोड़
1 अगस्त 2023₹5 करोड़ (अब भी लागू)

जाँच के समय FY 2026-27 के लिए कोई कम लिमिट नोटिफ़ाई नहीं हुई थी। ₹2 करोड़ की लिमिट की चर्चा अब तक नोटिफ़िकेशन नहीं बनी है। जाँचें

30 दिन की रिपोर्टिंग लिमिट: ₹10 करोड़

1 अप्रैल 2025 से, जिन बिज़नेस का एग्रीगेट सालाना टर्नओवर (AATO) ₹10 करोड़ या ज़्यादा है, वे कोई बिल, क्रेडिट नोट या डेबिट नोट उसकी तारीख से 30 दिन बाद IRP पर रिपोर्ट नहीं कर सकते।[2] IRP रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर देता है, और बिना IRN का B2B बिल वैध टैक्स इनवॉइस नहीं होता। पढ़ें 31वें दिन क्या होता है।

आपके बिलों पर HSN के अंक

Notification 78/2020-Central Tax पिछले साल के एग्रीगेट टर्नओवर से HSN कोड की लंबाई तय करता है।[3]

  • ₹5 करोड़ तक: B2B बिलों पर 4 अंक का HSN (B2C पर ज़रूरी नहीं)।
  • ₹5 करोड़ से ऊपर: सभी टैक्स इनवॉइस पर 6 अंक का HSN।

उदाहरण

  • पिछले साल ₹4.2 करोड़ वाला डिस्ट्रीब्यूटर, जिसका सबसे अच्छा साल ₹5.6 करोड़ (FY 2022-23) था: ई-इनवॉइस ज़रूरी है (एक साल ₹5 करोड़ से ऊपर); 30 दिन की लिमिट नहीं; पिछले साल के टर्नओवर से 4 अंक का HSN काफ़ी है।
  • पिछले साल ₹12 करोड़ वाला होलसेलर: ई-इनवॉइस ज़रूरी, 30 दिन की लिमिट लागू, 6 अंक का HSN।
  • ऐसा व्यापारी जिसका सबसे अच्छा साल ठीक ₹5 करोड़ था: अभी दायरे में नहीं, क्योंकि टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा होना चाहिए। इस साल की बिक्री पर नज़र रखें।

किसे छूट है

लिमिट से ऊपर होने पर भी इन्हें ई-इनवॉइस से छूट है: SEZ यूनिट (SEZ डेवलपर नहीं), बीमा कंपनियाँ, बैंकिंग कंपनियाँ और NBFC समेत वित्तीय संस्थाएँ, गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी, यात्री परिवहन सेवाएँ, मल्टीप्लेक्स स्क्रीन में सिनेमा टिकट, और सरकारी विभाग व स्थानीय निकाय। जाँचें लिमिट से ऊपर छूट वाले बिज़नेस को अपने बिलों पर यह घोषणा छापनी होती है कि उन पर ई-इनवॉइस लागू नहीं है।

यह आम जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं। जाँच आपके PAN पर एग्रीगेट टर्नओवर से होती है; आपका CA आँकड़ा और कोई भी छूट पक्की कर सकता है।

स्रोत

17 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया। आधिकारिक पोर्टल: einvoice1.gst.gov.in।

  1. Notification 10/2023-Central Tax, 10 मई 2023 (1 अगस्त 2023 से ₹5 करोड़), IRP के नोटिफ़िकेशन पेज पर: einvoice6.gst.gov.in।
  2. IRP नोटिस: ₹10 करोड़ और ऊपर AATO वाले बिज़नेस के लिए ई-इनवॉइस रिपोर्टिंग की नई समय सीमा: einvoice6.gst.gov.in।
  3. Notification 78/2020-Central Tax और GSTR-1 Table 12 में HSN पर GSTN की एडवाइज़री: tutorial.gst.gov.in।

और मुफ़्त टूल

सवाल-जवाब

ई-इनवॉइस लागू होना: आम सवाल

अब भी शक है? अपने CA से पूछें, या संपर्क पेज से हमें लिखें।

FY 2026-27 के लिए ई-इनवॉइस की लिमिट क्या है?

2017-18 से किसी भी वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ से ऊपर एग्रीगेट टर्नओवर। जब हमने जाँचा, FY 2026-27 के लिए कोई बदलाव नोटिफ़ाई नहीं हुआ था।

मेरा टर्नओवर ₹5 करोड़ से नीचे आ गया। क्या ई-इनवॉइस बंद कर दूँ?

नहीं। जाँच 2017-18 से किसी भी साल की है, इसलिए एक बार कोई साल ₹5 करोड़ पार कर गया, तो ई-इनवॉइस जारी रहता है।

क्या टर्नओवर हर GSTIN का अलग गिना जाता है?

नहीं। एग्रीगेट टर्नओवर पूरे भारत में एक ही PAN के हर GSTIN को जोड़ता है।

क्या ई-इनवॉइस B2C बिलों पर लागू है?

नहीं। B2C बिल IRP पर रिपोर्ट नहीं होते। ई-इनवॉइस में B2B बिल, क्रेडिट और डेबिट नोट, एक्सपोर्ट और SEZ सप्लाई आते हैं।

30 दिन के अंदर किसे रिपोर्ट करना है?

1 अप्रैल 2025 से ₹10 करोड़ या ज़्यादा एग्रीगेट सालाना टर्नओवर वाले बिज़नेस को। पुराने डॉक्यूमेंट IRP रिजेक्ट कर देता है।

क्या मेरा टर्नओवर सेव होता है?

नहीं। जाँच आपके ब्राउज़र में चलती है और हमें कुछ नहीं भेजा जाता।

मुफ़्त शुरू करें

अलग पोर्टल के बिना ई-इनवॉइस

Moharbill बिल सेव करते ही IRN लेता है, हर पेंडिंग बिल के 30 दिन गिनता है और IRP से पहले HSN अंक जाँचता है।

छपे GST बिल पर लाल Moharbill मोहर लगाते हाथ का चित्र, पास में QR कोड वाला लैपटॉप बिल और पेमेंट टिक वाला फ़ोन।